25. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 25 || चरणदास चोर
25. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 25 || चरणदास चोर विजयदान देथा राजस्थान के विख्यात लेखक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित विजयदान देथा (1 सितम्बर 1926 - 10 नवम्बर 2013) जिन्हें बिज्जी के नाम से भी जाना था। अपनी मातृ भाषा राजस्थानी भाषा को आदर देने के लिए उन्होंने अन्य किसी भाषा में नहीं लिखा। उनका अधिकतर कार्य उनके एक पुत्र कैलाश कबीर द्वारा हिन्दी में अनुवादित किया। इनका जन्म बोरुंदा-जोधपुर गाँव में 1 सितंबर 1926 को हुआ। वे देथा गोत्र के चारण थे। उनके पिता सबलदान देथा और दादा जुगतिदान देथा भी राजस्थान के जाने-माने कवियों में से थे। 10 नवम्बर 2013 को 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। अनेक प्रसिद्ध कृतियां लिखने वाले विजयदान जी की राजस्थानी लोक कथा पर आधारित एक प्रमुख कृति है चरणदास चोर। आज हम उसी कहानी को संक्षेप में आपको सुनाते हैं। चरणदास चोर राजस्थान में एक लोककथा प्रचलित है कि बहुत समय पहले राजस्थान में एक चोर चोरी क्या करता था। उसका नाम था चरणदास जब वह बड़ा हुआ तो चरणदास चोर के नाम से मशहूर हुआ। चरणदास चोर एक चोर की बहुत ही मजेदार...