23. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 23 || अक्ल बहादुर : राजस्थानी लोक कथा
23. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 23 || अक्ल बहादुर : राजस्थानी लोक कथा अक्ल बहादुर : राजस्थानी लोक कथा आज हम आपको जो कहानी सुनाने जा रहे हैं वह कहानी राजस्थानी भाषा की मूर्धन्य साहित्यकार लक्ष्मीकुमारी चूंडावत की राजस्थानी भाषा में लिखी गयी पुस्तक “ कैरे चकवा बात ” में से ली गई है। उन्हें एक अच्छी और सधी हुई लेखिका होने का गौरव प्राप्त है। हम चाहेंगे कि आपको कहानियां पढ़ने का शौक है तो उनकी पुस्तकें खरीद कर उनकी कहानियां अवश्य पढ़े। लक्ष्मीकुमारी चूंडावत द्वारा राजस्थानी भाषा में लिखी गई कहानी अक्ल बहादुर का हिंदी रूपांतरण है। जिसे हम आपको सुनाने जा रहे हैं। एक नगर में चार भाई रहते थे। चारों ही अक्ल से बड़े अक्लमंद थे। चारों ही भाई अक्ल के मामले में एक से बढ़कर एक थे। उनकी अक्ल के चर्चे आस-पास के गांवों व नगरों में फैले हुए थे। लोग उनकी अक्ल की तारीफ़ करते करते उन्हें अक्ल बहादुर कहने लगे थे। उनके नाम भी बुद्धि विशेषण को लिए हुए थे जैसे कि उनमें से एक भाई का नाम सौबुद्धि, दूजे का नाम हजार बुद्धि, तीसरे का नाम लाख बुद्धि, तो चौथे भाई का नाम करोड़ बुद्धि था। एक दिन चारों ने आ...