51008 || अष्टम कहानी || गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ; ब्राह्मण और नेवले की कथा; मूर्ख रोगी और वैद्य की कथा; मूर्ख पुरुष और तपस्वियों की कथा; घट और कर्पर नाम के चोरों की कथा;
51008 || अष्टम कहानी || गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ; ब्राह्मण और नेवले की कथा; मूर्ख रोगी और वैद्य की कथा; मूर्ख पुरुष और तपस्वियों की कथा; घट और कर्पर नाम के चोरों की कथा। अष्टम तरंग गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ दूसरे दिन रात को अपने वास-गृह में बैठे हुए और नई वधू को पाने के लिए उत्सुक वत्सराज के पुत्र का मनोरंजन करते हुए मन्त्री गोमुख ने, उसी की आज्ञा से फिर क्रमशः इस प्रकार कथाएँ कहना प्रारम्भ किया ॥ १-२॥ ब्राह्मण और नेवले की कथा¹ किसी नगर में देवशर्मा नाम का एक ब्राह्मण था। उसको देवदत्ता नाम की स्त्री उसी के समान अच्छे कुल की थी ॥३॥ उसकी पत्नी ने गर्भ धारण करके यथासमय एक पुत्र उत्पन्न किया। वह ब्राह्मण निर्धन होने पर भी उस पुत्र को एक महती सम्पत्ति के लाभ के समान समझता था ॥४।। सूतक के अन्त में, उसकी स्त्री नदी में स्नान करने गई और देवशर्मा उस नवजात शिशु की देख-भाल करता हुआ घर में ही रहा ॥५॥ इतने में ही राजा के रनिवास से स्वस्ति-वाचन के लिए उसे बुलाने एक दासी वहाँ आई ।।६।। तब वह ब्राह्मण दक्षिणा के लोभ से शिशु की रक्षा के लिए अपने पालतू नेवले को वह...