51009.10 || दशम कहानी || नरवाहन दत्त और शक्तियसा का विवाह।
51009.10 || दशम कहानी || नरवाहन दत्त और शक्तियसा का विवाह। दशम तरंग तब दूसरे दिन फिर रात में, मनोरंजन के लिए मन्त्री गोमुख ने नरवाहनदत्त के लिए यह कथा सुनाई ।।।१॥ प्राचीन समय में धारेश्वर नामक शिव-क्षेत्र में बहुत-से शिष्यों द्वारा सेवित एक महामुनि रहता था ।॥२॥ किसी समय उस मुनि ने, अपने शिष्यों से कहा- 'तुम लोगों में से किसी ने कोई अपूर्व कुछ देखा या सुना हो, तो बताओ' ॥३॥ मुनि के ऐसा कहने पर एक शिष्य बोला- 'मैने जो कुछ नया सुना है, उसे कहता हूँ, सुनिए' ॥४॥ कश्मीर देश में विजय नाम का विशाल शिव-क्षेत्र है। उस क्षेत्र में एक विद्याभिमानी संन्यासी था ।।५।। एकबार वह संन्यासी 'मैं सब स्थानों पर विजयी होऊँ, ऐसी कामना करता हुआ शिवजी को प्रणाम करके शास्त्र-वाद (शास्त्रार्थ) के लिए पाटलिपुत्र की ओर चला ॥६॥ रास्ते में जंगलों, नदियों और पहाडों को लांघता हुआ वह एक सुनसान वन में पहुंचकर एक वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा ॥७॥ कुछ ही समय के पश्चात् बावली से शीतल उस स्थान पर उसने लम्बी यात्रा के कारण धूल से भरे, सोंटा और कुंडी हाथ में लिये हुए एक धार्मिक पुरुष को देखा ।।८।। उसके वहाँ...