5902. || द्वितीय कहानी || नरवाहनदत्त का अलंकारवती के घर जाना; अशोकमाला की कथा; स्थूलभुज विद्याबर की कथा; अनंगरति की कथा; अनंगप्रभा को कथा; अनंगप्रभा और मवनप्रभ की कथाद्वितीय तरंग
5902 . || द्वितीय कहानी || नरवाहनदत्त का अलंकारवती के घर जाना; अशोकमाला की कथा; स्थूलभुज विद्याबर की कथा; अनंगरति की कथा; अनंगप्रभा को कथा; अनंगप्रभा और मवनप्रभ की कथा द्वितीय तरंग नरवाहनदत्त का अलंकारवती के घर जाना तदनन्तर, वह वत्सेश्वर का पुत्र नरवाहनदत्त, कौशाम्बी नगरी में, पिता के घर पर, नई वधू अलंकारवती के साथ रहने लगा ॥१॥ वह वहाँ रहकर दहेज में प्राप्त अलंकारवती की दासियों के साथ नाच-गान आदि से मनोविनोद करता हुआ तया अपने साथी मन्त्रियों के साथ मद्य-सेवन करता हुआ समय व्यतीत करता था ।॥२॥ एक बार, अलंकारवती की माता कांचनप्रभा, नरवाहनदत्त के पास आई और उसके उचित स्वागत कर लेने पर, उससे बोली-॥३॥ 'बेटा, तुम हमारे घर सुन्दरपुर आओ और उस नगर के उद्यानों में अलंकारवती के साथ विवरण करो' ॥४॥ यह सुनकर, वहाँ जाना स्वीकार करके और उसी की बात को पिता से निवेदन करके, पिता के नर्म-सचिव वसन्तक तथा अन्य मन्त्रियों एवं वपू अलंकारवती के साथ नरवाहनदत्त, सास द्वारा विया के प्रभाव से निर्मित विमान पर सवार होकर आकाश-मार्ग से सुन्दरपुर को गया ।॥५-६।। विमान पर चढ़ा हुआ वह नरवाहनदत्त, नीचे की एक पृथ्व...