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5906. || षष्ठ कहानी || चन्द्रस्वामी और उसके पुत्र महीपाल की कथा ; चक्र और लङ्कग नामक वैश्यपुत्रों की कथा; नहंकारी मुनि, पतिवता स्त्री और धर्मव्याथ की कथा; नल और दमयन्ती की कथा;

5906. || षष्ठ कहानी || चन्द्रस्वामी और उसके पुत्र महीपाल की कथा ; चक्र और लङ्कग नामक वैश्यपुत्रों की कथा; नहंकारी मुनि, पतिवता स्त्री और धर्मव्याथ की कथा; नल और दमयन्ती की कथा;  षष्ठ तरंग तदनन्तर, गोमुत्र द्वारा कही गई कथा के सुनने से सन्तुष्ट राजा नरवाहह्मदत्त ने, मरुभूति को गोमुत्र की ईर्ष्या से कुछ क्रुद्र-सा वेलकर उसे प्रसन्न करते हुए कहा है मरुभूति तुम भी एक कवा यों नहीं कहते?' ॥१-२॥ तब मरुभूति ने 'बहुत बच्छा, कहता हूँ' इस प्रकार उत्तर देकर कथा आरम्भ की ॥३॥  चन्द्रस्वामी और उसके पुत्र महीपाल की कथा  रात्रन्, प्राचीन काल में राजा कमलवर्मा के कमलपुर नामक नगर में चन्द्रस्वामो नाम कर एक श्रेठ ब्राह्मग रहता था ।।४।। उस सद्‌बुद्धिवाले ब्राह्यम की लक्ष्मी और सरस्वती के समान तीसरी नम्रता की मूत्ति देवमति नाम की पत्नी थी ।।५।। उस ब्राह्मण को उस पत्नी में शुभ लक्षणोंवाला एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसके उत्पन्न होते ही अकातवाणी हुई कि हे चन्द्रस्वामी, तू इन बालक का नाम महीपाल रखना। क्योंकि, यह राजा होकर चिरकाल तक पृथ्वी का पालन करेगा ॥६-७ ॥ इन प्रकार दिव्य वाणी को सुनकर चन्द्र...