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5.101. || प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा

5.101. ||  प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा प्रथम कहानी प्रथम तरङ्ग' मंगलाचरण' शिवजी की गोद में बैठी हुई पार्वती के दृष्टिपाशों से मानों कामदेव द्वारा वेष्टित शिवजी का श्यामवर्ण कंठ आपको सम्पत्ति प्रदान करे || १ ||  सन्याकालीन नृत्य के समय आकाश में बिखरी हुई प्राचीन तारिकाओं को शुंड से हटाकर, सीत्कार के बिन्दुओं से मानों नवीन तारिकाओं की सृष्टि करते हुए गणेशजी आपकी रक्षा करे || २ || मैं समस्त पदार्थों को प्रकाशित करने के लिए दीपशिखा (लो) के समान सरस्वती भगवती को प्रणाम करके बृहत्कथा के सार का संग्रह करता हूँ ॥ ३ ॥ प्रस्तावना इस संग्रह के प्रथम लम्बक का नाम कथापीट, उसके अनन्तर दूसरे का नाम कथामुख लवक और तीसरे का नाम लावान (ण) क लम्बक है ||४|| इसके अनन्तर नरवाहनदत्त नामक चतुर्थ लम्बक है । चतुर्दारिका लम्बक पाँचवाँ और मदनमचुका लम्बक छठा है ॥५॥ इसके बाद रत्नप्रभा लम्बक सातवाँ और सूर्यप्रभ लम्बक आठवाँ है ॥ ६ ॥ इसके बाद नवाँ अलकारवती लम्बक, दसव लम्बक शक्तियशा और इसके अनन्तर ग्यारहवाँ वेला नामक लम्बक है ॥७॥ इसके पश्चात् बारहवां शशांकवती लम्वक, तेरहवाँ ...