51006 || षष्ठ कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); कौओं और उल्लुओं की कथा¹; चतुर्वन्त नाम के हाथी और खरगोशों की कथा; शश और कपिंजल को कथा; ब्राह्मण और धूर्तों की कथा; कौए और उल्लुओं की कथा का शेषांश; वृद्ध बनिया और चोर की कथा; बाह्मण, चोर और राक्षस की कथा; रथकार और उसकी पत्नी की कथा; मेढकों के वाहन सर्प को कथा; मूर्ख सेवकों की कथा; अपूपमुग्ध की कथा; एक मूर्ख नौकर की कथा; महिषीमुग्ध की कथा।
51006 || षष्ठ कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); कौओं और उल्लुओं की कथा¹; चतुर्वन्त नाम के हाथी और खरगोशों की कथा; शश और कपिंजल को कथा; ब्राह्मण और धूर्तों की कथा; कौए और उल्लुओं की कथा का शेषांश; वृद्ध बनिया और चोर की कथा; बाह्मण, चोर और राक्षस की कथा; रथकार और उसकी पत्नी की कथा; मेढकों के वाहन सर्प को कथा; मूर्ख सेवकों की कथा; अपूपमुग्ध की कथा; एक मूर्ख नौकर की कथा; महिषीमुग्ध की कथा। षष्ठ तरंग नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत) रात बीतने पर प्रातःकाल नरवाहनदत्त उठकर पिता बत्सराज (उदयन) के दर्शन के लिए उनके पास गया ।॥१॥ वहाँ महारानी पद्मावती के भाई और मगधराज (प्रद्योत) के पुत्र सिहह्वर्मा के आने पर उसके स्वागत, कुशल-प्रश्न तथा अन्यान्य वार्तालाप में दिन व्यतीत होने पर नरवाहनदत्त भोजन करके अपने भवन में आया ॥२-३॥ तब शक्तियशा के लिए उत्सुक नरवाहनदत्त का मनोरंजन करने के लिए बुद्धिमान् मन्त्री गोमुख ने यह कथा कही ॥४॥ कौओं और उल्लुओं की कथा¹ किसी जंगल में बहुत बड़ा वटवृक्ष था। जो पक्षियों के कलरव से मानों पक्षियों के विश्राम के लिए सदा उन्हें बुलाता रहता था ।।५।। उ...