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Showing posts from October, 2024

Saheen Mumbai

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यदि समझ ना आए तो व्हाट्सएप्प कॉल कर लेना। Here are the solutions of the above questions. Q.5  X-axis and line x = – 4 are parallel lines. What is the distance between them? Ans. The question is incorrect. The question should be "Y-axis and line x = 4 are parallel lines. What is the distance between them?  or  X-axis and line y = 4 are parallel lines. What is the distance between them?" If the question is "Y-axis and line x = 4 are parallel lines. What is the distance between them?" then the answer is as follows. x = −4 is the equation of the line parallel to the Y-axis at a distance of 4 units and to the left of Y-axis. Thus, the distance between them is 4 units. OR If the question is "X-axis and line y = 4 are parallel lines. What is the distance between them?" then the answer is as follows. y = −4 is the equation of the line parallel to the X-axis at a distance of 4 units and below the X-axis. Thus, the distance between them is 4 u...

दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाईए

घर-घर जाकर बर्तन मांजकर स्वयं और पुत्र का गुजारा करने वाली मां को एक दिन उसके बेटे ने अध्यापक का दिया हुआ एक पत्र थमाते हुए कहा कि अध्यापक ने यह पत्र केवल आपको देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है, तुम इस पत्र को अपनी मां को दे देना। मां ने जैसे ही यह पत्र पढ़ा वह मन ही मन मुस्कुराने लगीं। मां को मुस्कुराता देख बेटे ने खुशी का कारण पूछा, जिस पर मां ने बड़े प्यार से बेटे के सिर पर अपनी ममता का हाथ फेरते हुए कहा, "बेटा, इसमें लिखा है कि आपका बेटा कक्षा में सबसे होशियार है। हमारे पास ऐसे अध्यापक नहीं हैं जो आपके बच्चे को पढ़ा सकें। इसलिए आप इसका दाखिला किसी और स्कूल में करवा दीजिए।"  लड़का यह सुनकर बहुत खुश हो गया । वह और मन लगाकर पढ़ने लगा। मां ने बेटे का दाखिला दूसरे स्कूल करवा दिया। अब उस बच्चे ने खूब मन बगाकर पढ़ाई की और आगे चलकर वह अपनी मेहनत के दम पर महान वैज्ञानिक बना। मां की मृत्यु के पश्चात जब एक दिन आइंस्टीन ने मां की अलमारी खोली तो पाया कि उसमें उनके अध्यापक का लिखा हुआ वही पत्र भी रखा है, जो उन्होंने कभी उस छोटे से बच्चे को उसकी मां को देने के लिए कहा था। उस वैज्ञानिक...

श्वेत नीलकंठ

राधे राधे, जय श्री कृष्ण। श्री शिवाय नमस्तुभ्यं। श्री साम्ब सदा शिवाय नमः।  आपका प्यारा मित्र ॐ  जितेंद्र सिंह तोमर एक बार फिर से आपके लिए लेकर आया है एक और नई कहानी।  इस बार की कहानी भारत की आन, बान और शान महाराज विक्रमादित्य के राज्य से जुड़ी हुई है। एक बार राजा विक्रमादित्य के दरबार में एक ब्राह्मण आया। उसने विक्रमादित्य से दान में इतना धन मांगा कि वह आराम से जिंदगी बिता सके।  विक्रमादित्य जैसा कि नाम के अनुसार पराक्रम में ही नहीं विधान देने में भी बहुत बड़े दानवीर थे। अतः उन्होंने उस ब्राह्मण को खेत खलिहान, गौशाला, घुड़साल सहित एक गांव का जागीरदार बना दिया और इन से मिलने वाले सभी पदार्थ पर उसका अधिकार कर दिया।  पहले पहले तो ब्राह्मण ने बहुत मेहनत की किंतु धीरे-धीरे वह नौकरों के आधीन हो गया। उसके पास मौजूद जमीन बहुत उपजाऊ थी। धीरे-धीरे ब्राह्मण आलसी हो गया। उसके शरीर को आराम से  रहने की आदत हो गई। ब्राह्मण की अर्धांगनी उससे स्वयं का काम स्वयं करने को कहती पर वह उसकी एक नहीं सुनता। अब वह ब्राह्मण दिनभर खाली बैठा रहता और गप्पें हांकता रहता। रिश्तेदार और का...

5.101. || YT || प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा

5.101. ||  प्रथम कहानी || शिव और पार्वती का संवाद और पार्वती के जन्म की कथा महाकवि श्री सोमदेवभट्ट - विरचित कथाओं को हम आपको सुनाने जा रहे हैं। प्रथम कहानी, मंगलाचरण से प्रारंभ होती है। चलिए और कहानी सनिए। प्रथम तरङ्ग' मंगलाचरण' शिवजी की गोद में बैठी हुई पार्वती के दृष्टिपाशों से कह रहीं हैं कि कामदेव द्वारा वेष्टित शिवजी का श्यामवर्ण कंठ आपको सम्पत्ति प्रदान करे || १ ||  संध्याकालीन नृत्य के समय आकाश में बिखरी हुई प्राचीन तारिकाओं को शुंड से हटाकर, सीत्कार के बिन्दुओं से मानों नवीन तारिकाओं की सृष्टि करते हुए गणेशजी आपकी रक्षा करे || २ || मैं समस्त पदार्थों को प्रकाशित करने के लिए दीपशिखा (लो) के समान सरस्वती भगवती को प्रणाम करके बृहत्कथा के सार का संग्रह करता हूँ ॥ ३ ॥ प्रस्तावना इस ग्रंथ में 18 लंबक हैं। ||९|| ये कथाएं बृहत्कथा नामक मूलग्रन्थ का संग्रह है। इसमें थोड़ा सा भी अन्तर नहीं है। हाँ, विस्तृत कथाओं को संक्षिप्त जरूर किया गया है। ताकि लंबी कथाओं को आसानी से स्मरण में रखा जा सके। भाषा का भेद होने के कारण थोड़ा बहुत परिवर्तन हो सकता है परंतु सार वही रखने का प्रयास किय...