51009 || नवम कहानी || नवम तरंग गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त को सुनाई गई विविध कयाएँ दूसरे दिन रात में, फिर पहले के ही समान मनोविनोद करते हुए गोमुख मन्त्री ने नरवाहनदत्त के लिए कथा सुनाई ॥१॥ बोधिसत्त्व के अंश से उत्पन बनिये को कथा किसी नगर में बोधिसत्त्व के अंश से उत्पन्न किसी धनी बनिये (सेठ) का लड़का था, जिसकी माँ मर गई थी ॥२॥ दूसरी स्त्री (सौतेली माँ) के वशीभूत और उसी के द्वारा प्रेरित पिता से वनवास के लिए निर्वासित वह पुत्र, अपनी पत्नी के साथ घर से निकल गया ।॥३॥ अपने साथ आते हुए अपने अशान्तचित्त छोटे भाई को लौटाकर वह दूसरे ही मार्ग से गया ॥४॥ चलते-चलते मार्ग में भोजन-रहित वह क्रमशः प्रचंड सूर्य की किरणों से संतप्त महान् मरुस्थल में जा पहुँचा ॥५॥ उस मरुस्थल में, सात दिनों तक थकी-माँदी और भूखी-प्यासी स्त्री को वह अपने मांस और रक्त से जिलाता रहा। वह पापिनी भी उसे खाती-पीती रही। ॥६॥ आठवे दिन, वह एक पहाड़ी जंगल में पहुंचा, जो पहाड़ी नदी की तरंगों से मुखरित, फल-बाले सघन वृक्षों की छायाबाला और हरी घासों के मैदानों से रमणीय था ॥७॥ वहाँ पर थकी-मांदी अपनी पत्नी को कन्द, मूल, फल, जल आदि से स्वस...
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51008 || अष्टम कहानी || गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ; ब्राह्मण और नेवले की कथा; मूर्ख रोगी और वैद्य की कथा; मूर्ख पुरुष और तपस्वियों की कथा; घट और कर्पर नाम के चोरों की कथा;
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51008 || अष्टम कहानी || गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ; ब्राह्मण और नेवले की कथा; मूर्ख रोगी और वैद्य की कथा; मूर्ख पुरुष और तपस्वियों की कथा; घट और कर्पर नाम के चोरों की कथा। अष्टम तरंग गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ दूसरे दिन रात को अपने वास-गृह में बैठे हुए और नई वधू को पाने के लिए उत्सुक वत्सराज के पुत्र का मनोरंजन करते हुए मन्त्री गोमुख ने, उसी की आज्ञा से फिर क्रमशः इस प्रकार कथाएँ कहना प्रारम्भ किया ॥ १-२॥ ब्राह्मण और नेवले की कथा¹ किसी नगर में देवशर्मा नाम का एक ब्राह्मण था। उसको देवदत्ता नाम की स्त्री उसी के समान अच्छे कुल की थी ॥३॥ उसकी पत्नी ने गर्भ धारण करके यथासमय एक पुत्र उत्पन्न किया। वह ब्राह्मण निर्धन होने पर भी उस पुत्र को एक महती सम्पत्ति के लाभ के समान समझता था ॥४।। सूतक के अन्त में, उसकी स्त्री नदी में स्नान करने गई और देवशर्मा उस नवजात शिशु की देख-भाल करता हुआ घर में ही रहा ॥५॥ इतने में ही राजा के रनिवास से स्वस्ति-वाचन के लिए उसे बुलाने एक दासी वहाँ आई ।।६।। तब वह ब्राह्मण दक्षिणा के लोभ से शिशु की रक्षा के लिए अपने पालतू नेवले को वह...
51007 || सप्तम कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); यशोधर और लक्ष्मीघर की कथा; मगर और वानर की कथा; कान और हृदय से हीन गधे की कथा; धनी और गवैये की कथा; मूर्ख शिष्यों की कथा; चावल खाने वाले मूर्ख की कथा; गधे का दूध दुहने की कथा।
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51007 || सप्तम कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); यशोधर और लक्ष्मीघर की कथा; मगर और वानर की कथा; कान और हृदय से हीन गधे की कथा; धनी और गवैये की कथा; मूर्ख शिष्यों की कथा; चावल खाने वाले मूर्ख की कथा; गधे का दूध दुहने की कथा। सप्तम तरंग रात बीतने और प्रातःकाल होने पर, प्राणप्यारी शक्तियशा के लिए उत्सुक नरवाहनदत्त, उसका ध्यान करता हुआ व्याकुल हो गया ।॥१॥ उसके विवाह की एक मास की अवधि को एक युग के समान मानते हुए नववधू के लिए उत्सुक-हृदय नरवाहनदत्त को, चैन नहीं मिल रहा था। ॥२॥ गोमुख के मुख से यह समाचार जानकर उसके पिता वत्सराज ने स्नेह के कारण वसन्तक के साथ अपने मित्रों को भेजा ॥३॥ उनलोगों के गौरव (आश्वासन) से नरवाहनदत्त के कुछ धीरज घरने पर चतुर मन्त्री गोमुख ने, वसन्तक से कहा- ॥४।। 'आर्य वसन्तक, युवराज के मन को प्रसन्न करनेवाली कोई नई और रोचक कथा सुनाओ' ॥५॥ यशोधर और लक्ष्मीघर की कथा तब बुद्धिमान् वसन्तक ने कथा प्रारम्भ की। मालव देश में श्रीधर नाम का प्रसिद्ध और श्रेष्ठ ब्राह्मण रहता था। उसके यहाँ एक साथ दो बालक उत्पन्न हुए। बड़े का नाम यशोधर और छोटे का नाम लक्ष्मीघर था ।॥६-७।। यु...
51006 || षष्ठ कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); कौओं और उल्लुओं की कथा¹; चतुर्वन्त नाम के हाथी और खरगोशों की कथा; शश और कपिंजल को कथा; ब्राह्मण और धूर्तों की कथा; कौए और उल्लुओं की कथा का शेषांश; वृद्ध बनिया और चोर की कथा; बाह्मण, चोर और राक्षस की कथा; रथकार और उसकी पत्नी की कथा; मेढकों के वाहन सर्प को कथा; मूर्ख सेवकों की कथा; अपूपमुग्ध की कथा; एक मूर्ख नौकर की कथा; महिषीमुग्ध की कथा।
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51006 || षष्ठ कहानी || नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत); कौओं और उल्लुओं की कथा¹; चतुर्वन्त नाम के हाथी और खरगोशों की कथा; शश और कपिंजल को कथा; ब्राह्मण और धूर्तों की कथा; कौए और उल्लुओं की कथा का शेषांश; वृद्ध बनिया और चोर की कथा; बाह्मण, चोर और राक्षस की कथा; रथकार और उसकी पत्नी की कथा; मेढकों के वाहन सर्प को कथा; मूर्ख सेवकों की कथा; अपूपमुग्ध की कथा; एक मूर्ख नौकर की कथा; महिषीमुग्ध की कथा। षष्ठ तरंग नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत) रात बीतने पर प्रातःकाल नरवाहनदत्त उठकर पिता बत्सराज (उदयन) के दर्शन के लिए उनके पास गया ।॥१॥ वहाँ महारानी पद्मावती के भाई और मगधराज (प्रद्योत) के पुत्र सिहह्वर्मा के आने पर उसके स्वागत, कुशल-प्रश्न तथा अन्यान्य वार्तालाप में दिन व्यतीत होने पर नरवाहनदत्त भोजन करके अपने भवन में आया ॥२-३॥ तब शक्तियशा के लिए उत्सुक नरवाहनदत्त का मनोरंजन करने के लिए बुद्धिमान् मन्त्री गोमुख ने यह कथा कही ॥४॥ कौओं और उल्लुओं की कथा¹ किसी जंगल में बहुत बड़ा वटवृक्ष था। जो पक्षियों के कलरव से मानों पक्षियों के विश्राम के लिए सदा उन्हें बुलाता रहता था ।।५।। उ...