5805. || पंचम कहानी || सूर्यप्रभ चरितः रणभूमि में संग्राम; शरभानना योगिनी के पराक्रम की कथा
5805. || पंचम कहानी || सूर्यप्रभ चरितः रणभूमि में संग्राम; शरभानना योगिनी के पराक्रम की कथा पंचम तरंग सूर्यप्रभ चरितः रणभूमि में संग्राम प्रभात-काल होते ही वे सूर्यप्रभ आदि तथा श्रुतशर्मा आदि तैयार होकर अपनी-अपनी सेनाओं के साथ रणभूमि में आकर डट गये ॥१॥ और ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र आदि देवता तथा असुर, यक्ष गन्धर्व एवं राक्षस बादि युद्ध देखने के लिए आकाश के अवकाश में फिर से आकर एकत्र हो गये ॥२॥ श्रुतशर्मा की सेना में सेनापति दामोदर ने चक्रव्यूह बनाया और सूर्यप्रभ की सेना में सेनापति प्रभास ने ववन्नूह की रचता की ॥३॥ व्यूह-रचना के पश्चात् दोनों सेनाओं का युद्ध प्रारम्भ हुआ और रणवाद्यो तथा सैनिकों के शब्दों से सारी दिशाएँ गूंज उठीं ॥४॥ भली-भांति शस्त्रों से मारे गये शूर-वीर मेरे मंडल का भेदन¹ करते हैं, इसलिए भय से मानों सूर्य भगवान् बाणों के जाल के अन्दर ढक गये ॥५।। दामोदर के बनाये हुए चक्रब्यूह को दूसरे बीर से अभेद्य जानकर सूर्यप्रभ की आज्ञा से प्रभास, उसका भेदन करके ब्यूह में प्रवेश कर गया ॥६॥ प्रभास द्वारा ब्यूह में किये गये छेद के मुँह पर दामोदर स्वयं आकर डट गया और वहाँ...