5501. || प्रथम कहानी || वत्सराज की सभा में शक्तिवेग का आगमन; शिव और माधव नामक घूर्त्तों की कथा; हरस्वामी की कया;
5.501. || प्रथम कहानी || वत्सराज की सभा में शक्तिवेग का आगमन; शिव और माधव नामक घूर्त्तों की कथा; हरस्वामी की कया; चतुर्दारिका नामक पंचम लम्बक प्रथम तरंग वत्सराज की सभा में शक्तिवेग का आगमन मद-घूर्णित मुख से छिटकते हुए सिन्दूर से सुशोभित मानों अपने तेज से विघ्नों को नष्ट, करते हुए और सिन्दूरी आभा से पृथ्वी को रजित करते हुए गजानन आपकी रक्षा करें ।॥१॥ इस प्रकार उस एकमात्र कुमार नरवाहनदत्त का पालन-पोषण करता हुआ वत्सराज उदयन महारानी वासवदत्ता के साथ सुखपूर्वक रहने लगा ।।२।। एकबार पुत्र की रक्षा के लिए व्याकुल राजा को देखकर मन्त्री यौगन्धरायण ने एकान्त में राजा से कहा ॥३॥ 'राजन् ! तुम्हें राजकुमार नरवाहनदत्त के लिए अब किसी प्रकार की चिन्ता नहीं करनी चाहिए ।।४।। इस राजकुमार को भगवान् शिव ने होनेवाले विद्याधरों के चक्रवर्ती के रूप में तुम्हारे घर में उत्पन्न किया है ।।५।। विद्याघरों के राजा, अपनी विद्याओ के प्रभाव से इस बात को जानकर ईर्ष्या (जलन) के कारण अत्यन्त क्षुब्ध हो गये है ।।६।। इस बात को जानकर शिवजी ने उसकी रक्षा के लिए अपने स्तम्भक नामक गणों के सरदार को नियुक्त किया है।॥७७॥ वह गण...