10. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 10 || अब कब आओगे?
10. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 10 || अब कब आओगे? राम सिंह बिस्तर पर से उठा, तो अचानक से छाती में दर्द महसूस होने लगा । उसे लगा शायद गैस ज्यादा हो गई है जिसके कारण उसका दबाव हार्ट की तरफ बढ़ गया है। उसने सोचा कि मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसा सोचते हुए वह साथ में आगे वाले कमरे में गया जिसे वे आमतौर पर बैठक कहकर पुकारते थे। उसने देखा कि उसका पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त हैं। उसने अपनी पत्नी को देखकर कहा, "स्नेहा! मेरी छाती में आज कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, बर्दाश्त नहीं हो रहा । डाॅक्टरर को दिखा कर आता हूँ।" "ठीक है, मगर सँभलकर जाना, जरूरत पड़े तो फोन करना।" मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं, उसने राम सिंह की तरफ निगाह उठाकर भी नहीं देखी। राम सिंह एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, उसे बहुत पसीना आ रहा था, उसने एक्टिवा स्टार्ट करने का कई बार असफल प्रयास किया परंतु ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं कर पाया। इसी समय उनके घर का काम करने वाला हरी साईकिल पर वहां आ गया। यह हरि के काम पर आने का समय था। हरी राम सिंह के घर में पोछा लगाने बरतन तथा कपड़े धोने का काम ...