कहानी : एक चादर / एक कफन (आंसुओं भरा एक संकल्प)
कहानी : एक चादर / एक कफन (आंसुओं भरा एक संकल्प) बचपन में बुजुर्गों के साथ बैठने की आदत पड़ गई थी। आदत पढ़ने में मेरा एक स्वार्थ छुपाहआ था। मेरा ही नहीं मुझ जैसे और बच्चों का भी। हमारा वह स्वार्थ था कि बुजुर्ग हमें कहानियां सुनाया करते थे जिनमें हमें बहुत आनंद आता था। परंतु वे अपनी कहानी एक बात से शुरू किया करते थे कि पहले यह बताओ कि आप बीती सुनाएं या जग बीती सुनाएं। उस वक्त समझ नहीं आता था परन्तु हम कभी अपबीती बोल देते थे तो कभी जाग बीती बोल देते । तब उन्होंने कहानी सुनानी शुरू की ... एक बार की बात है कि सीधे, सच्चे और मेहनती किसानों का एक छोटा-सा गाँव था, हरियाली से घिरा हुआ, होता भी क्यों नहीं, यहां के किसान अपने पसीने की कमाई से धरती माता का पेट जो भरते थे। इस छोटे से गांव का मिट्टी में खेती-बाड़ी से ही जीवन चलता था। इस गांव के लोग गरीब ज़रूर थे, लेकिन दिलों से अमीर। जहाँ रूपए-पैसों की कमी थी, मगर इंसानियत की कोई कमी नहीं थी…" इसलिए अन्न और धन उनके लिए कोई मायने नहीं रखता था। गाँव के लोग अपने-अपने काम में व्यस्त रहते और ईमानदारी से खेती करते। उनकी मेहनत ...