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51002 || द्वितीय कहानी || विक्रर्मासह और कुमुविका बेश्या की कथा; चन्द्रश्री और शीलहर वैश्य की कथा; दुःशीला और देवदास की कथा; बज्रसार और उसकी स्त्री की कथा; राजा सिहबल और रानी कल्याणवती की कथा

51002 || द्वितीय कहानी || विक्रर्मासह और कुमुविका बेश्या की कथा; चन्द्रश्री और शीलहर वैश्य की कथा; दुःशीला और देवदास की कथा; बज्रसार और उसकी स्त्री की कथा; राजा सिहबल और रानी कल्याणवती की कथा द्वितीय तरंग विक्रर्मासह और कुमुदिका वेश्या की कथा इस प्रकार, मरुभूति द्वारा वेश्याओं के कृत्रिम प्रेम की कथा सुनाये जाने पर बुद्धिमान् गोमुख ने राजा विक्रमसिंह और कुमुदिका वेश्या की कथा इस प्रकार कही-॥१॥ प्रतिष्ठान नगर में विक्रमिह नाम का राजा था, जिसे विधाता ने नाम के अनुसार पराक्रम में भी सिह के समान बनाया था ॥२॥ उस राजा की अशिलेखा नाम की रानी थी, जो उच्च वंश में उत्पन्न और सर्वांग-सुन्दरी थी ॥३॥ एक बार अपने नगर में रहते हुए उसके पाँच-छह भाई-बन्धुओं ने मिलकर उसे घेर लिया। उन पांचों के नाम इम प्रकार थे महाभट, वीरबाहु, सुबाहु, सुभट और राजा प्रतापादित्य । (छठा स्वयं विक्रमसिंह था।) ये सभी महा बलवान् ये ।।४-५।। जब राजा के मन्त्री, उनके साथ सन्धि आदि करके उन्हें शान्त करने का यत्न कर रहे थे, तभी राजा विक्रमसिह मन्त्री के परामर्श का अनादर कर युद्ध के लिए बाहर निकल पड़ा ।।६।। दोनों सेनाओं के बीच शस्त्...