Posts

Showing posts with the label 5.202. || दूसरी कहानी || राजा सहस्त्रनीक

5.202. || दूसरी कहानी || राजा सहस्त्रनीक, रानी मृगावती के विवाह व उदयन के जन्म की कथा

5.202. || दूसरी कहानी || राजा सहस्त्रनीक, श्रीवत्त व रानी मृगावती के विवाह व उदयन के जन्म की कथा द्वितीय तरंग उस दिन राजा (सहस्रानीक) कुछ दूर रास्ता चलकर किसी जंगली तालाब के किनारे पड़ाव डालकर ठहर गया ॥ १॥ उस शिविर में सन्ध्या के समय सेवा के लिए आये हुए संगतक नामक कथा कहने ( कहानी सुनाने) वाले सेवक' से राजा ने कहा ॥ २ ॥ मृगावती के मुखकमल का दर्शन करने के लिए उत्सुक मेरे मन को बहलानेवाली कोई कथा ( कहानी ) सुनाओ ॥ ३॥ तब मंगलक ने कहा- 'राजन् ! क्यो व्यर्थ संताप करते हो । शाप के नष्ट होते ही तुम्हारा महारानी के साथ समागम सुनिश्चित है ॥४॥ हे स्वामिन्! जीवन में मनुष्य को अनेक संयोग और वियोग हुआ करते है। इस सम्बन्ध में तुमको मैं एक कहानी सुनाता हूँ, सुनो' ॥५॥ श्रीवत्त और मृगांकवती की कथा मालव देश में यज्ञसेन नाम का एक ब्राह्मण था । उस सज्जन ब्राह्मण के दो लोकप्रिय पुत्र थे ॥ ६ ॥ उनमें एक कालनेमि के नाम से और दूसरा विगतभय नाम से प्रसिद्ध हुआ ||७|| पिता की मृत्यु के पश्चात् वे दोनों भाई बाल्यावस्था के अनन्तर विद्या प्राप्ति के लिए पाटलिपुत्र नगर को गये ॥ ८ ॥ वहाँ पर विद्या प्राप्ति ...