5601. || प्रथम कहानी || मदनमंचुका नामक छठा लम्बक; नरवाहनदत्त को युवावस्था; राजा कलिङ्गवस की कथा; सुरभिदत्ता अप्सरा की कया; राजा धर्मदत्त की कथा; सात ब्राह्मणों की कथा; एक ब्राह्मण और चाण्डाल की कथा; राजा विक्रर्मासह और वो ब्राह्मणों की कथा; धष्ठ लम्बक
5601. || प्रथम कहानी || नरवाहनदत्त को युवावस्था; राजा कलिङ्गवस की कथा; सुरभिदत्ता अप्सरा की कया; राजा धर्मदत्त की कथा; सात ब्राह्मणों की कथा; एक ब्राह्मण और चाण्डाल की कथा; राजा विक्रर्मासह और वो ब्राह्मणों की कथा; धष्ठ लम्बक मदनमंचुका नामक छठा लम्बक प्रथम तरंग ऊपर उठते और नीचे झुकते हुए मस्तक से विघ्नों के समूह को मानों दूर करते हुए गजानन आपकी रक्षा करें ।॥१॥ उस कामदेव को नमस्कार है, जिसके बाणों के प्रहार से, पार्वती द्वारा निरन्तर आलिगित रहने पर भी शिवजी का शरीर सदा रोमांचित रहता है।॥२॥ विद्याधरों का चक्रवर्ती साम्राज्य प्राप्त करके अपने को एक तटस्थ व्यक्ति बनाकर नर-वाहनदत्त ने वार्तालाप के प्रसंग में सपत्नीक महर्षियों के पूछने पर प्रारम्भ से लेकर जिस प्रकार अपना चरित्र वर्णन किया, अब उसे सुनो ॥३॥ पिता वत्सराज द्वारा पालन-पोषण करते हुए नरवाहनदत्त ने अपनी बाल्यावस्था के आठ वर्ष व्यतीत किये ॥४॥ नरवाहनदत्त को युवावस्था उस समय वह राजकुमार नरवाहनदत्त, मन्त्रियों के पुत्रों के साथ, विद्याओं की शिक्षा ग्रहण करता हुआ और उद्यानों में खेलता हुआ समय व्यतीत कर रहा था ।।५।। रानी वासवदत्ता और रानी...