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51004 || चतुर्थ कहानी || राजाकुलधर के सेवक की कथा; संजीवक बैल और पिंगलक सिह की कथा; कील उखाडने वाले बन्दर की कथा; दमनक और करटक का संबाद; नगाड़ा और सियार की कथा; बगुला और केकड़े की कथा; सिह और शश की कथा; मन्दविसर्पिणी जूं और खटमल की कथा; मदोत्कट सिह की कथा; टिट्टिभ-दम्पती को कथा; कछुए और हंस को कथा; तीन मच्छों की कथा; टिट्टिभ-दम्पती की कथा (क्रमागत); सूचीमुख पक्षी और बन्दर की कथा; धर्मबुद्धि और दुष्टबुद्धि वैश्यों की कथा; साँप और बगुले की कथा; लोहे का तराजू और वैश्यपुत्र की कथा।

51004 || चतुर्थ कहानी || राजाकुलधर के सेवक की कथा; संजीवक बैल और पिंगलक सिह की कथा; कील उखाडने वाले बन्दर की कथा; दमनक और करटक का संबाद; नगाड़ा और सियार की कथा; बगुला और केकड़े की कथा; सिह और शश की कथा; मन्दविसर्पिणी जूं और खटमल की कथा; मदोत्कट सिह की कथा; टिट्टिभ-दम्पती को कथा; कछुए और हंस को कथा; तीन मच्छों की कथा; टिट्टिभ-दम्पती की कथा (क्रमागत); सूचीमुख पक्षी और बन्दर की कथा; धर्मबुद्धि और दुष्टबुद्धि वैश्यों की कथा; साँप और बगुले की कथा; लोहे का तराजू और वैश्यपुत्र की कथा। चतुर्थ तरंग मन्त्रियों में श्रेष्ठ गोमुख ने इस प्रकार दो विद्याधर्धारियों (मकरन्दिका और मनोरथ प्रभा) की कथा सुनाकर नरवाहनदत से कहा ॥१॥ 'स्वामी, इस लोक और परलोक दोनों लोकों का हित चाहनेवाले कुछ ही ऐसे विद्वान् व्यक्ति होते हैं, जो साधारण होकर भी काम, क्रोध, लोभ आदि की उत्तेजना का सहन करते हैं ।॥२॥ राजाकुलधर के सेवक की कथा इस प्रसंग में एक कथा सुनो राजा कुलघर का प्रसिद्ध पराक्रमी शूरवर्मा नाम का एक सेवक था ।।३।। वह किसी समय, अपने गाँव से लौटकर सहसा अपने घर में घुसा, तो उसने अपनी स्त्री को अपने एक मित्र के साथ ...