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Showing posts from August, 2024

जिगर की फिकर

जिगर की फिकर लिवर शरीर का वह अंग है जो 70 फीसदी तक खराब होने पर भी काम करता है। यही इसकी खूबी भी है। लेकिन कभी-कभी इसी वजह से लिवर में हुए इन्फेक्शन और सूजन का जल्दी पता ही नहीं चलता। इसलिए लिवर की सेहत के लिए सचेत रहना जरूरी है। हेपटाइटिस (लिवर की सूजन) की वैक्सीन की बात हो या फिर इसकी जांच की। इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। हेपटाइटिस का इन्फेक्शन कितनी बड़ी चुनौती है, बचने के उपाय क्या हैं, एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती आज हेपटाइटिस डे  पर विशेष क्यों है चुनौती हेपटाइटिस B दुनियाभर में -25.4 करोड़ लोग हेपटाइटिस B से हैं इन्फेक्टेड -11 लाख से ज्यादा लोग हर साल मारे जाते हैं इससे भारत में -2.98 करोड़ से ज्यादा लोग हैं इन्फेक्टेड11% मरीज पूरी दुनिया के भारत में -95% तक से भी ज्यादा सफल है हेपटाइटिस B वैक्सीन। दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा लिवर कैंसर के मामले हेपटाइटिस B की वजह से ही होते हैं। हेपटाइटिस दो शब्दों से मिलकर बना है। जिनका मतलब होता है लिवर या जिगर में सूजन यानी इन्फ्लेमेशन। सीधे शब्दों में कहें तो जब लिवर में किसी भी वजह से सूजन हो जाए तो उस स...
जिगर की फिकर लिवर शरीर का वह अंग है जो 70 फीसदी तक खराब होने पर भी काम करता है। यही इसकी खूबी भी है। लेकिन कभी-कभी इसी वजह से लिवर में हुए इन्फेक्शन और सूजन का जल्दी पता ही नहीं चलता। इसलिए लिवर की सेहत के लिए सचेत रहना जरूरी है। हेपटाइटिस (लिवर की सूजन) की वैक्सीन की बात हो या फिर इसकी जांच की। इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। हेपटाइटिस का इन्फेक्शन कितनी बड़ी चुनौती है, बचने के उपाय क्या हैं, एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती आज हेपटाइटिस डे  पर विशेष क्यों है चुनौती हेपटाइटिस B दुनियाभर में -25.4 करोड़ लोग हेपटाइटिस B से हैं इन्फेक्टेड -11 लाख से ज्यादा लोग हर साल मारे जाते हैं इससे भारत में -2.98 करोड़ से ज्यादा लोग हैं इन्फेक्टेड11% मरीज पूरी दुनिया के भारत में -95% तक से भी ज्यादा सफल है हेपटाइटिस B वैक्सीन। दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा लिवर कैंसर के मामले हेपटाइटिस B की वजह से ही होते हैं। हेपटाइटिस दो शब्दों से मिलकर बना है। जिनका मतलब होता है लिवर या जिगर में सूजन यानी इन्फ्लेमेशन। सीधे शब्दों में कहें तो जब लिवर में किसी भी वजह से सूजन हो जाए तो उस स...
वे दर्द दें तो... 'इस शहर में हर शख्स परेशान-सा क्यों है...' परेशानी की वजह कई बार खुद की समस्याएं होती हैं तो कई बार ऐसे लोग भी होते हैं जो परेशानियां पैदा करते हैं। कभी अपने शब्दों से तो कभी कामों से। उन्हें दूसरों को परेशानी में देखना या दुखी देखना अच्छा लगता है। वे इसे एंजॉय करते हैं। ऐसे लोग रिश्तों में, ऑफिस में, पड़ोस में, सफर में कहीं भी मिल सकते हैं। जब ऐसे लोगों से अक्सर साबका होने लगे तो निदान खोजना जरूरी हो जाता है। टॉक्सिक लोगों के साथ किस तरह बर्ताव करना चाहिए, क्या करना चाहिए और क्या नहीं? देश के बेहतरीन एक्सपर्ट्स से बात करके जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती 8 खास बातें 1. अपनी ज़िंदगी में दूसरों का दखल कितना हो, यह तय होना जरूरी है। सीधे कहें तो अपनी ज़िंदगी का रिमोट दूसरों के हाथों में न जाने दें। 2. अगर बाउंड्री बनाना आसान न हो तो इस कान से सुनना और दूसरे से निकालना सही है यानी बोलते रहो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। 3. परिवार में कोई शख्स अगर हर वक्त कमियों, नाकामियों पर फोकस करता हो तो समस्या की जड़ तक पहुंचें। 4. कई बार चीजें सामूहिक तौर पर कही जाती हैं,...
हाइट की फाइट  दुनिया में हर किसी की अपनी अलग शख्सियत, शारीरिक बनावट और लंबाई होती है। लेकिन पैरंट्स की इच्छा रहती है कि उनके बच्चे की लंबाई ज्यादा हो। हालांकि लंबाई का सफलता से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी लोगों में भ्रम है कि अच्छी लंबाई होना सफल होने के लिए ज़रूरी है। लेकिन किसी बच्चे की लंबाई कितनी होगी, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है। पैरंट्स के लिए इन फैक्टर्स को समझना ज़रूरी है ताकि वे लंबाई बढ़ाने का दावा करने वाले गलत तरीकों से बच सकें: इन बातों पर निर्भर करती है लंबाई  माता-पिता की लंबाई यह सबसे अहम फैक्टर है जो बच्चे की लंबाई तय करता है। किसी भी बच्चे की लंबाई का 70-80 फीसदी निर्धारण माता-पिता की औसत लंबाई से होता है। अगर माता-पिता लंबे हैं तो 70-80 फीसदी आसार है कि बच्चे लंबे होंगे। अगर माता-पिता की औसत लंबाई कम है तो बच्चों की लंबाई भी कम होगी। वहीं बच्चों की लंबाई पर नाना-नानी और दादा-दादी की लंबाई का भी असर पड़ता है। यह एक ऐसा अनुवांशिक कारण है जिसे बदला नहीं जा सकता है। पोषण सही वक्त पर सही पोषण न मिलना भी लंबाई कम कर सकता है, खासकर अगर बच्चे के खाने में प्रोटीन...

नैचुरोपैथी

Open sidebar ChatGPT  4o mini Log in You said: Write a blog on naturopathy as long as you can in Hindi ChatGPT said: ChatGPT नैचुरोपैथी: एक स्वाभाविक चिकित्सा पद्धति आज की आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में जहां तकनीकी उन्नति और दवाओं की अधिकता है, वहीं नैचुरोपैथी एक ऐसा उपचार विकल्प है जो प्राकृतिक और स्वाभाविक पद्धतियों पर आधारित है। नैचुरोपैथी का मुख्य उद्देश्य शरीर की स्वाभाविक उपचार क्षमता को प्रोत्साहित करना है और बीमारी को इसके मूल कारण से ठीक करना है। आइए जानते हैं नैचुरोपैथी के बारे में विस्तार से। नैचुरोपैथी का परिचय नैचुरोपैथी, जिसे प्राकृतिक चिकित्सा भी कहा जाता है, एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है जो प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करती है। यह प्रणाली प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, चीनी चिकित्सा, और पारंपरिक हर्बल चिकित्सा से प्रभावित है। नैचुरोपैथी का उद्देश्य शरीर के स्वाभाविक संतुलन को बहाल करना और रोग की जड़ों को ठीक करना है, न कि केवल लक्षणों को दबाना। नैचुरोपैथी के सिद्धांत नैचुरोपैथी के कई सिद्धांत हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित ...