हाइट की फाइट 
दुनिया में हर किसी की अपनी अलग शख्सियत, शारीरिक बनावट और लंबाई होती है। लेकिन पैरंट्स की इच्छा रहती है कि उनके बच्चे की लंबाई ज्यादा हो। हालांकि लंबाई का सफलता से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी लोगों में भ्रम है कि अच्छी लंबाई होना सफल होने के लिए ज़रूरी है। लेकिन किसी बच्चे की लंबाई कितनी होगी, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है। पैरंट्स के लिए इन फैक्टर्स को समझना ज़रूरी है ताकि वे लंबाई बढ़ाने का दावा करने वाले गलत तरीकों से बच सकें:

इन बातों पर निर्भर करती है लंबाई 

माता-पिता की लंबाई
यह सबसे अहम फैक्टर है जो बच्चे की लंबाई तय करता है। किसी भी बच्चे की लंबाई का 70-80 फीसदी निर्धारण माता-पिता की औसत लंबाई से होता है। अगर माता-पिता लंबे हैं तो 70-80 फीसदी आसार है कि बच्चे लंबे होंगे। अगर माता-पिता की औसत लंबाई कम है तो बच्चों की लंबाई भी कम होगी। वहीं बच्चों की लंबाई पर नाना-नानी और दादा-दादी की लंबाई का भी असर पड़ता है। यह एक ऐसा अनुवांशिक कारण है जिसे बदला नहीं जा सकता है।

पोषण
सही वक्त पर सही पोषण न मिलना भी लंबाई कम कर सकता है, खासकर अगर बच्चे के खाने में प्रोटीन की कमी हो। इसका मतलब यह बिलकुल नहीं कि एक्स्ट्रा प्रोटीन देने से बच्चा ज्यादा लंबा हो सकता है। पोषण की कमी अगर जन्म के पहले 4-5 बरसों में हो तो वह लंबाई पर ज्यादा असर करती है। ऐसे में सभी पैरंट्स को पोषण पर ध्यान देना चाहिए।

बीमारियां
 ये भी मुख्य वजह हैं लंबाई कम होने की। अगर कोई बच्चा लंबे समय तक किसी बीमारी से पीड़ित रहा हो तो इसकी वजह से भी लंबाई पर असर पड़ सकता है। लंबी बीमारी से मतलब एक महीने से ज्यादा रहने वाली बीमारी से है। यह बीमारी किसी भी तरह की हो सकती है जैसे लंबे समय तक खांसी की शिकायत होना, खून की कमी होना, पेट में कीड़े होना, टी.बी. या बार-बार दस्त लगना आदि। यह काफी अहम वजह है और इससे बचा भी जा सकता है। बच्चे को बार-बार बीमारी हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें और पक्का इलाज करवाएं।

घर का माहौल
घर के माहौल का असर भी बच्चे की लंबाई पर पड़ सकता है। पैरंट्स या घर के दूसरे सदस्यों के बीच अगर तनाव रहता है या झगड़ा होता रहता है तो बच्चे पर असर आता है। जिस तरह से आज के वातावरण में तनाव बढ़ रहा है निश्चित तौर पर यह आगे चलकर बच्चों की लंबाई पर असर डालेगा।

हॉर्मोंस से जुड़ी बीमारियां
हॉर्मोन से जुड़ी कई तरह की बीमारियां भी बच्चे की लंबाई को प्रभावित कर सकती हैं। इन सभी हॉर्मोंस से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। ऐसे में बेहद बहुत ज़रूरी है कि इनका जल्दी पता चले और इलाज बिना देरी के शुरू किया जाए।
हॉर्मोंस से जुड़ी बीमारियां जो लंबाई कर सकती हैं कम
-थायराइड हॉर्मोन का कम बनना
-ग्रोथ हॉर्मोन की कमी
-एड्रिनल ग्लैंड के हॉर्मोन का ज्यादा बनना- (Cushing Syndrome)
-कुछ दूसरी हॉर्मोन की बीमारियां जो दुर्लभ हैं

कब और कैसे बढ़ती है बच्चे की लंबाई?

पैदा होने के समय स्वस्थ बच्चे की लंबाई- 50 सेमी
सालभर में बढ़कर- 75 सेमी
2 या 3 साल में बढ़कर- 87 से 94 सेमी 
4 साल पूरे होने पर- 100 सेमी
इसके बाद हर साल लंबाई में बढ़ोतरी- 5.5 सेमी

प्यूबर्टी डिवेलपमेंट के दौरान इतनी बढ़ती है लंबाई
लड़के- 20-30 सेमी 
लड़कियां-18-20 सेमी
(यहां औसतन लंबाई बताई गई है।)

बच्चों में प्यूबर्टी शुरू होने के बाद 2 या 3 साल के अंदर पूरी लंबाई बढ़ जाती है। इसका उम्र के साल से कोई संबंध नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि जिन बच्चों में प्यूबर्टी जल्दी शुरू होती है, उनकी फाइनल हाइट उन बच्चों के मुकाबले कम होती है जिनका विकास देर से शुरू होता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी लड़की में ब्रेस्ट का डिवेलपमेंट 9 साल में शुरू होता है तो पीरियड्स शुरू होने के 2 साल के भीतर लंबाई बढ़नी बंद हो जाती है। इसी तरह लड़कों में टेस्टिस का आकार में बढ़ने के 2-3 साल के अंदर लंबाई बढ़नी बंद हो जाती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि पैरंट्स अपने बच्चे की लंबाई की तुलना उसके दोस्तों से या क्लासमेट से या पड़ोस के बच्चों से करते हैं और कहते हैं कि मेरा बेटा छोटा है। यह सही नहीं है क्योंकि हर बच्चे के माता-पिता की लंबाई अलग-अलग होती है। यह तुलना सही नहीं है। इसके अलावा बच्चे के दोस्तों की उम्र भी अलग हो सकती है। पैरंट्स को इससे बचना चाहिए। चचेरे भाइयों या बहनों से तुलना भी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लड़के-लड़कियों को आपस में तुलना नहीं कर सकते। असल में पैरंट्स को किसी भी तरह की तुलना से बचना चाहिए।

लंबाई को लेकर कुछ भ्रांतियां
-लटकने से लंबाई बढ़ती है। 
-वजन उठाने (वेट लिफ्टिंग) से लंबाई कम बढ़ती है। गलत
-ज्यादा विटामिन लेने से ज्यादा लंबाई बढ़ती है। गलत
-बाजार में मिलनेवाले प्रोटीन पाउडर से ज्यादा लंबाई बढ़ती है। गलत
-खाना कम खाने से लंबाई बढ़ती है या खाना ज्यादा खाने से। गलत
-हॉर्मोन के इंजेक्शन या गोलियों से ज्यादा लंबाई बढ़ती है। गलत
(सब पर लागू नहीं होता।) ऐसे सामान्य बच्चे के लिए यह गलत है जिसमें हॉर्मोन की कमी न हो। इनके प्रयोग के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

लंबा करने के झूठे दावे
कुछ लोग जड़ी-बूटी से बच्चों की लंबाई बढ़ाने का दावा करते हैं। ये सभी दावे वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध नहीं हैं। इनसे बचना चाहिए। यह भी संभव है कि इनके प्रयोग से लंबाई बढ़ने के बजाय इसके साइड इफेक्ट आपके बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स के विकास के लिए घातक हो जाएं और भविष्य की उनकी शादीशुदा जिंदगी पर असर डालें या उनके माता या पिता बनने की क्षमता को प्रभावित कर दें। सभी पैरंट्स के लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि एक सामान्य और स्वस्थ बच्चे की लंबाई को दवाइयों के ज़रिए नहीं बढ़ाया जा सकता। अगर पैरंट्स की लंबाई कम है तो उनके बच्चे की लंबाई को इलाज से नहीं बढ़ाया जा सकता है। यह कुदरत के खिलाफ है। हालांकि कुछ शुरुआती वैज्ञानिक रिसर्च में यह पाया गया है कि सामान्य स्वस्थ बच्चे को एक्सट्रा ग्रोथ हॉर्मोन देकर उसकी लंबाई में बढ़ोतरी की जा सकती है लेकिन बाद के प्रयोगों से पता चला है कि इससे बच्चे की अंतिम ऊंचाई नहीं बढ़ाई जा सकती।

लंबाई नापने का तरीका
सभी पैरंट्स यह जानने के लिए बहुत उत्सुक होंगे कि क्या किसी तरह से लंबाई बढ़ाई जा सकती है। लेकिन ज़रूरत है एक वैज्ञानिक नज़रिए की। सबसे पहले बच्चे की सही लंबाई नापना सीखना चाहिए जो काफी आसान है। घर में एक सीधी दीवार का चुनाव करें। बच्चे को दीवार के साथ इस तरह खड़े होने को कहें ताकि उसकी ऐड़ियां, हिप्स, कंधे और सिर के पीछे का हिस्सा दीवार को छूता हो। दोनों पांवों के अंगूठे एक-दूसरे से बिलकुल चिपके हो। ऐड़ियां ज़मीन से उठी नहीं हों और आंखें ज़मीन के समानांतर देख रही हों। ऐसी मुद्रा में एक पतला लेकिन सख्त गत्ते का टुकड़ा लेकर उसके सिर पर ऐसे रखें कि बाल दब जाएं। इसके बाद एक पेंसिल या पेन से गत्ता जहां दीवार को छू रहा हो, वहां पर निशान लगा दें। ज़मीन से इस लंबाई को सामान्य फीते से नाप लें। यह बच्चे की सही लंबाई है। लंबाई सेंटीमीटर में नापना ज़रूरी है, बजाय इंच या फुट में।   

लंबाई में सामान्य बढ़ोतरी
4 साल की उम्र के बाद एक सामान्य और स्वस्थ बच्चा (लड़का या लड़की दोनों) हर साल औसतन 5.5 सेमी बढ़ता है। इसका मतलब यह है कि आपका बच्चा साल में 5 सेमी से ज्यादा नहीं बढ़ता तो पीडियाट्रिक्स या हॉर्मोन स्पेशलिस्ट से तुरंत मिलना चाहिए। एक बार प्यूबर्टी डिवेलपमेंट शुरू हो जाए तो इस तरह की जांच करना संभव नहीं होता है।

क्या करें कि ग्रोथ ठीक रहे
इसके लिए सबसे ज़रूरी है कि बिना देरी किए एक्सपर्ट से मिलें। पीडियाट्रिक्स या हॉर्मोन स्पेशलिस्ट इसके लिए ट्रेंड होते हैं। वहां माता-पिता दोनों का साथ जाना ज़रूरी है ताकि उनकी भी लंबाई नापी जा सके जो काफी अहम है। सबसे पहले बच्चे की लंबाई को ग्रोथ चार्ट पर लगा कर देखा जाता है कि आपका बच्चा छोटा है या नहीं।

हर बर्थडे पर नापें अपने बच्चे की लंबाई
लंबाई को नियमित रूप से नापना बहुत अच्छा और आसान तरीका है जिससे यह जान सकते हैं कि बच्चा सामान्य रूप से बढ़ रहा है या नहीं। कभी-कभी पैरंट्स मान लेते है या उन्हें कोई सलाह देता है कि बच्चा नहीं बढ़ रहा है तो कोई बात नहीं, आगे चलकर बढ़ जाएगा। यह अच्छी बात नहीं है बल्कि घातक सिद्ध हो सकता है। अगर बच्चे को कोई बीमारी है और इसकी वजह से लंबाई नहीं बढ़ रही है तो उसका तुरंत इलाज होना जरूरी है। पैरंट्स के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि अगर बच्चे को किसी भी तरह की बीमारी है, जो उसकी लंबाई को प्रभावित कर रही है तो उसके इलाज में देरी होने पर बच्चे की फाइनल हाइट निश्चित तौर पर कम हो जाएगी। देरी करना बच्चे की लंबाई को हमेशा के लिए प्रभावित कर देगा। एक आसान तरीका यह है कि आप बच्चे के हर जन्मदिन पर उसकी सही लंबाई नापकर सुनिश्चित करें कि वह सही तरीके से बढ़ रहा है या नहीं। यह आपके बच्चे के लिए बर्थ-डे का सबसे बड़ा गिफ्ट होगा।

एक्सपर्ट: डॉ. राजेश खड़गावत, प्रफेसर, एंडोक्राइनॉलजी डिपार्टमेंट, AIIMS
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