5703. || तृतीय कहानी || निश्चयवल और अनुरागपरा की कथा; बन्दर बने सोमस्वामी की कथा
5703. || तृतीय कहानी || निश्चयवल और अनुरागपरा की कथा; बन्दर बने सोमस्वामी की कथा तृतीय तरंग निश्चयवल और अनुरागपरा की कथा इस प्रकार, रत्नप्रभा से कही गई कथा के क्रम में नरवाहनदत्त का मन्त्री गोमुख उससे कहने लगा- ॥१॥ सच है, सदाचारिणी स्त्रियाँ विरल होती हैं। प्रायः स्त्रियां चंचला (दुराचारिणी) ही होती हैं और विश्वास के योग्य भी नहीं होती। इस प्रसंग में यह भी एक क्या सुनें ॥२॥ संसार में प्रसिद्ध उज्जयिनी नाम की नगरी है। प्राचीन समय में वहाँ निश्चयदत्त नाम का बनिया का बेटा रहता था ॥ ३॥ वह जुआरी था और प्रतिदिन जूए से वन जीतकर, शिप्रा नदी में स्नान और महाकालेश्वर शिव की पूजा करके ब्राह्मणों, दीनों एवं अनायो को दान देकर चन्दन, इत्र, भोजन, ताम्बूल आदि का व्यवहार करता था। (वह बहुत खर्चीला और शौकीन था) ॥४-५॥ वह निश्चयदत्त, प्रतिदिन स्नान, पूजा आदि करके महाकाल-मन्दिर के समीप श्मशान में जाकर शरीर में चन्दन लगाता था ।॥ ६॥ वह युवक वैश्य, उस श्मशान में खड़े एक पत्थर के खम्भे पर, चन्दन लगाकर उस पर अपनी पौठ रगड़ता था ।॥७॥ प्रतिदिन पीठ के रगड़ने में वह माम्भा, अत्यन्त चिकना और सुन्दर हो गया था। एक बार उ...