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5605. || पंचम कहानी || कलिंगसेना ओर सोमप्रभा की कथा; उषा और अनिरुद्ध की कथा; कलिगसेना की कौशाम्बी-यात्रा; यौगन्धरायण का राजनीतिक षड्यन्त्र;

5605. || पंचम कहानी || कलिंगसेना ओर सोमप्रभा की कथा; उषा और अनिरुद्ध की कथा; कलिगसेना की कौशाम्बी-यात्रा; यौगन्धरायण का राजनीतिक षड्यन्त्र;  पंचम तरंग कलिंगसेना ओर सोमप्रभा की कथा (चालू) तदनन्तर दूसरे दिन, प्रातःकाल आई हुई सहेली सोमप्रभा से विश्वस्त बातें करती हुई कलिंगसेना कहने लगी ॥१॥ मेरा पिता, मुझे प्रसेनजित् को अवश्य दे देगा, यह निश्चित है। यह मैंने अपनी माता से सुना है और तूने उस वृद्ध प्रसेनजित् को देखा है।॥२॥ वत्सराज को तो रूप (सुन्दरता) में जैसा तूने वणित किया है कि उसने कानों के मार्ग से प्रवेश करके मेरा हरण कर लिया है।॥३॥ इसलिए पहले मुझे प्रसेनजित् को दिखाओ। और, मुझे वहाँ भी ले चलो, जहाँ वत्सराज है। पिता मे क्या प्रयोजन और माता से भी क्या करना है ।॥४।॥ इस प्रकार कहती हुई उत्कंठित कलिंगसेना को सोमप्रभा ने कहा- 'यदि चलना है तो यन्त्रचालित आकाशयान से चले ।।५।। किन्तु तुम अपने वस्त्र, आभूषण और सेवकों को साथ ले लो; क्योंकि वत्सराज को देखकर फिर तुम लौट न सकोगी ॥६॥ फिर तुम माता-पिता को न देखोगी और न उन्हे स्मरण ही करोगी, अर्थात् सब भूल जाओगी ।।७।। और हे सखि, न मैं ही तुम्हारे प...