11. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 11 || मामा सब्जी वाला (एक संस्मरण)
11. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 11 || मामा सब्जी वाला (एक संस्मरण) दिल्ली एक ऐसा शहर है जिसमें किसी हर रोज एक या दो घटना किसी भी व्यक्ति के साथ घटित हो जाना आम बात है कुछ लोग उन घटनाओं पर ध्यान देते हैं कुछ उन्हें यूं ही हंसी में टाल देते हैं वैसे एक घटना हमारे पड़ोस में घटी आइए उसी घटना का आपसे जिक्र करते हैं। { *स्नेह के आँसू* } ======= गली से गुजरते हुए सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर से बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा। "दीदी जी ! सब्जी ले लो । बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने मुझसे सब्जी नहीं खरीदी, क्या कोई और देकर जा रहा है?" सब्जी वाले ने चिल्लाकर कहा। *"रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।"* उसके बाद महिला घर से नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली - "भैया ! तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।...