01. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 01 || गांव का नालायक बेटा
01. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 01 || गांव का नालायक बेटा यह कहानी उत्तर प्रदेश से आए एक व्यक्ति की है जो इस महामारी में अपने गांव न जा सका लेकिन उसने यह कहानी जब हमें बताई तो मैं इसे लिखे बिना भी नहीं रह सका। शब्द उसी व्यक्ति के हैं । विचार प्रवाह में इसमें थोड़ा बहुत परिवर्तन हो सकता है। 13/6/1/5/2021 गांव का नालायक बेटा मेरे दोस्त ने कहानी कहना शुरू की कि आज अब्दुल फिर से अपने काम को बंद किए हुए हैं । वह अपने दुकान के अंदर बैठा हुआ किसी सोच में डूबा हुआ है। उसे याद आ रहें हैं पिछले साल के वे दिन जो उसने काले दिनों के रूप में बिताए थे। गांव के बुजुर्ग जिनके बीच उसका बचपन बीता था और जिन्हें वह दादा कहता था, चाचा कहता था, काका कहता था, अम्मा कहता था, दादी कहा करता था, अब से कुछ समय पहले तक वे सब उससे मुंह मोड़ रहे थे परंतु आज ऐसा क्या हो गया कि वे लोग ही आज उसे मसीहा कहते हुए थक नहीं रहे हैं। कहानी पिछले वर्ष 2020 महामारी काल में शुरू हुई थी। 2020 का कोरोना काल देश के लिए ही नहीं अपितु विश्व भर के लिए सबसे बुरा समय बनकर आया था। यह वही समय था जिसमें उत्तर प्रद...