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5.205. || पंचम कहानी || उदयन की कथा : वासवदत्ता-हरण; गुहसेन और बेवस्मिता की कथा; सिद्धी की कथा; सेठ समुद्रदत्त और शक्तिमती की कथा; समुद्रवत्त की कथा क्रনহা:

5.205. || पंचम कहानी ||  उदयन की कथा : वासवदत्ता-हरण; गुहसेन और बेवस्मिता की कथा; सिद्धी की कथा;  सेठ समुद्रदत्त और शक्तिमती की कथा; समुद्रवत्त की कथा क्रনহা: पंचम तरंग उदयन की कथा : वासवदत्ता-हरण कुछ समय के अनन्तर पिता के पक्षपात से रहित होकर वासवदत्ता को वत्सराज उदयन के प्रति प्रगाढ़ प्रेम हो गया ।।१।। यह जानकर मन्त्री यौगन्धरायण अदृश्य रूप से पुनः राजा उदयन के समीप आया । उसकी अदृश्यकारिणी विद्या के प्रभाव से उसे दूसरे व्यक्ति न देख सके ॥ २॥ उसने वसन्तक के सामने ही राजा से कहा- 'महाराज, तुम्हे चंडमहासेन ने छल-कपट करके कैद कर लिया है और अपनी कन्या देकर तुम्हारा सम्मान करके तुम्हें छोड देगा ॥३॥ इसलिए हम लोग स्वयं उसकी कन्या का अपहरण करके ले चलते है। इस प्रकार इस अभिमानी का मान भंग होगा और मसार में तुम्हारी दुर्बलता का अपवाद भी न होगा' ।॥४-५।। राजा चंडसेन ने कन्या वासवदत्ता को भद्रवनी नाम की हस्तिनी दी है। वह इतनी शीघ्रता से चलती है कि दूसरे हाथी, केवल एक नडागिरि को छोड़कर, उसका पीछा नहीं कर सकते। नडागिरि भी, उसे देखकर युद्ध नहीं करता। उस भद्रवती हस्तिनी के पीलवान (महावत) का ना...