19. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 19 || फल वाली बुढ़िया माई
19. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 19 || फल वाली बुढ़िया माई फल वाली बुढ़िया माई, रमेश और उसके सभी साथियों को अच्छी तरह पहचानती है। जब भी वे लोग उसकी दुकान से फल खरीदने पहुंचते हैं तो वह उनको दुआ देती नही थकती। "आखिर क्यों?" बात उस दिन की है जब ऑफिस से निकल कर रमेश ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि तभी उसे याद आया कि पत्नी ने कहा था कि लौटते वक़्त एक दर्ज़न केले लेते आना। तभी उसे सड़क किनारे बड़े, साफ और ताज़ा केले बेचते हुए एक कमजोर और बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया माई दिखाई दी थी। तो उसने अपना स्कूटर उस फल वाली बुढ़िया के पास रोक दिया। वैसे तो रमेश फल हमेशा "फ्रेश फ्रूट भण्डार" से ही लेते थे, पर आज रमेश को लगा कि क्यों न बुढ़िया माई से ही खरीद लूँ ? वह बुढ़िया माई के पास गया और बोला, "माई, केले कैसे दिए" बुढ़िया माई बोली, "बाबूजी ! 20 रूपये दर्जन।" रमेश जानता था कि केले 20 रूपये दर्जन हीं मिलेंगे फिर भी उसने बुढ़िया माई से कहा, " माई ! 15 रूपये दूंगा। बुढ़िया माई ने कहा, " 15 नहीं बाबू जी, 18 रूपये दे देना, दो पैसे मै भी कमा लूंगी। रम...