16. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 16 || "*मुझसे बड़ा संत *" (एक लघु कथा)
16. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 16 || "*मुझसे बड़ा संत *" (एक लघु कथा) एक समय की बात है एक सन्त रामेश्वरम भ्रमण के लिए गए। एक दिन वह धनुष्कोटी के समुद्र तट पर प्रात: काल भ्रमण कर रहे थे। समुद्र के तट पर उन्होने देखा कि एक पुरुष, एक स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ है। पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई है। सन्त का मन बहुत खिन्न हुआ। वे बहुत दु:खी हुए। उन्होने विचार किया कि ये मनुष्य कितना पतित, तामसिक और विलासी है। दिन निकला नहीं कि प्रात:काल में ही समुद्र देव के निकट शराब का सेवन करके पता नहीं किस स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ है और न जाने क्या-क्या विचार उनके दिमाग में घूमने लगे। थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई, सन्त ने देखा एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है, मगर वे स्वयं तैरना नहीं जानते थे। इस कारण वे उसे डूबते व्यक्ति को देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे। तभी उन्होंने देखा कि स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ वह व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु समुद्र के गहरे पानी में कूद गया। थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को पकड़ लिया और बचाकर किन...