5602. || दूसरा कहानी || कलिंगसेना के जन्म की कथा; सात राजकुमारियों की कथा; एक विरक्त राजकुमार की कथा; एक तपस्वी और राजा की कथा; राजा सुषेण और सुलोचना की कथा; कलिगसेना के पास सोमप्रभा का आगमन; एक राजपुत्र और वैश्यपुत्र की कथा; पिशाच और बाह्मण की कथा
5602. || दूसरा कहानी || कलिंगसेना के जन्म की कथा; सात राजकुमारियों की कथा; एक विरक्त राजकुमार की कथा; एक तपस्वी और राजा की कथा; राजा सुषेण और सुलोचना की कथा; कलिगसेना के पास सोमप्रभा का आगमन; एक राजपुत्र और वैश्यपुत्र की कथा; पिशाच और बाह्मण की कथा दूसरा तरंग कलिंगसेना के जन्म की कथा तदनन्तर तक्षशिला नगरी में गजा कलिंगदत्त की रानी तारादत्ता गर्भ-भार से धीरे-धीरे अलसाने लगी ।॥ १॥ प्रसव-काल के समीप आने पर पीले मुखवाली और चंचल नेत्र-तारों (पुतलियों) से आकर्षक रानी, उदीयमान चन्द्रलेखावाली पूर्व दिशा का अनुकरण करने लगी ॥२॥ कुछ ही दिनों के पश्चात् उससे असाधारण मुन्दरी कन्या उत्पन्न हुई, जो समस्त सौन्दर्य-सृष्टि के मिश्रण के समान थी ।॥ ३॥ ऐसा पुत्र क्यों नहीं उत्पन्न हुआ ? मानो इसी सोच में प्रसूति गृह के सभी रक्षादीप मलिन कान्तिवाले हो गये ।।४।। इतनी अलौकिक सुन्दरी कन्या के उत्पन्न होने पर भी पिता कलिगदत्त, उसी रूप के पुत्र की आशा के विफल होने के कारण खिन्न हो गया ।।५।। पुत्र का इच्छुक राजा, उस कन्या को दिव्य समझकर भी खिन्न ही रहा। सच है, वहाँ शोकमूलक कन्या और कहाँ मृत्तिमान् आनन्द पुत्र ? ।।...