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5607. || सप्तम कहानी || वत्सराज उदयन और कॉलगसेना की कथा; राजा श्रुतसेन की कथा; किसान की कथा; विद्युद्धोता और राजा श्रुतसेन की कथा (चालू); उन्माविनी और राजा देवसेन की कथा; मन्त्री यौगन्धरायण का राजनीतिक प्रपंच (चालू); उल्लू, नेवला, बिल्ली और चूहे की कथा;

5607. || सप्तम कहानी || वत्सराज उदयन और कॉलगसेना की कथा; राजा श्रुतसेन की कथा; किसान की कथा; विद्युद्धोता और राजा श्रुतसेन की कथा (चालू); उन्माविनी और राजा देवसेन की कथा; मन्त्री यौगन्धरायण का राजनीतिक प्रपंच (चालू); उल्लू, नेवला, बिल्ली और चूहे की कथा;  सातवाँ तरंग वत्सराज उदयन और कॉलगसेना की कथा (चालू) अपने देश और बन्धु-बान्धव आदि को छोड़कर आई हुई कलिंगसेना, गई हुई सखी सोमप्रभा को स्मरण करती हुई उदास होकर बैठी रही ॥१॥ नरेन्द्रकम्या कलिंगसेना, कौशाम्बी में वत्सराज के पाणिग्रहण महोत्सव में, विलम्ब होने के कारण जंगल से बाहर आकर व्याकुल हरिणी के समान हो रही थी ॥२॥ इधर कलिंगसेना के विवाह में विलम्ब करनेवाले वत्सराज भी ज्योतिषियों के प्रति कुछ रुष्ट-से रहे ।।३।। उस दिन, उत्त्सुकता से व्याकुल राजा उदयन, मनोविनोद के लिए महारानी बासवदत्ता के महल में गया ।॥४١١ वहाँ पर मन्त्री यौगन्धरायण द्वारा शिक्षित महारानी ने, किसी भी प्रकार का विकार न प्रकट करते हुए, सदा की भाँति उचित उपचारों से राजा का स्वागत-सत्कार किया ।।५।। 'कलिंगसेना का वृत्तान्त प्रसिद्ध हो जाने पर भी, महारानी पूर्व की ही भाँति क...