5705. || पञ्चम कहानी || राजपुत्र श्रृंगभुज और कपशिक्षा की कथा
5705. || पञ्चम कहानी || राजपुत्र श्रृंगभुज और कपशिक्षा की कथा पञ्चम तरंग राजपुत्र श्रृंगभुज और कपशिक्षा की कथा इस प्रकार, मरुभूति के कथा सुनाने पर सेनापति हरिशिख ने नरवाहह्नदत्त के सन्मुख कहा- ।।१।। 'यह सत्य है, कुलीन स्त्री के लिए पति ही एवामात्र गति है। इस प्रसंग में एक आश्चर्यमयी कथा सुनें-॥२॥ इस भूनल पर वर्धमान नामक जो नगर है, उसमें वीरभुज नाम का राजा था। उसकी रानियों में गुणवरा नाम की महारानी उसे प्राणों से भी अधिक प्यारी थी ॥३-४॥ उस राजा की एक सौ रानियों में एक को भी पुत्र (मन्तान) नहीं था ।॥५ इम कारण राजाने श्रुतवर्धन नामक वैद्य को बुलाकर पूछा कि क्या ऐसी कोई त्रऔषधि है कि जिसने पुत्र की उत्पत्ति हो महे ॥६॥ यह मुनकर वैद्य ने कहा- 'महाराज! में इस कार्य को सिद्ध करता हूँ; किन्तु यदि आप मेरे लिए एक जंगली बकरा मंगा दे ॥आ वैय की बात सुनकर राजा ने द्वारपाल को आज्ञा देकर जंगली बकरा मंगा दिवा ॥८॥ उम बकरे को राजा के रसोईदारी को देकर वैद्य ने, रानियों के लिए स्वादिष्ठ रस (शोरबा) बनवाया ॥९॥ राजा सब रानियों को एक स्थान पर आने की आज्ञा देकर स्वयं भगवान् की पूजा करने चला गया और सारी ...