दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाईए
घर-घर जाकर बर्तन मांजकर स्वयं और पुत्र का गुजारा करने वाली मां को एक दिन उसके बेटे ने अध्यापक का दिया हुआ एक पत्र थमाते हुए कहा कि अध्यापक ने यह पत्र केवल आपको देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है, तुम इस पत्र को अपनी मां को दे देना। मां ने जैसे ही यह पत्र पढ़ा वह मन ही मन मुस्कुराने लगीं। मां को मुस्कुराता देख बेटे ने खुशी का कारण पूछा, जिस पर मां ने बड़े प्यार से बेटे के सिर पर अपनी ममता का हाथ फेरते हुए कहा, "बेटा, इसमें लिखा है कि आपका बेटा कक्षा में सबसे होशियार है। हमारे पास ऐसे अध्यापक नहीं हैं जो आपके बच्चे को पढ़ा सकें। इसलिए आप इसका दाखिला किसी और स्कूल में करवा दीजिए।" लड़का यह सुनकर बहुत खुश हो गया । वह और मन लगाकर पढ़ने लगा। मां ने बेटे का दाखिला दूसरे स्कूल करवा दिया। अब उस बच्चे ने खूब मन बगाकर पढ़ाई की और आगे चलकर वह अपनी मेहनत के दम पर महान वैज्ञानिक बना। मां की मृत्यु के पश्चात जब एक दिन आइंस्टीन ने मां की अलमारी खोली तो पाया कि उसमें उनके अध्यापक का लिखा हुआ वही पत्र भी रखा है, जो उन्होंने कभी उस छोटे से बच्चे को उसकी मां को देने के लिए कहा था। उस वैज्ञानिक...