5608. || अष्टम कहानी || वत्सराज की कथा; पतिव्रता वैश्यपत्नी की कथा; मदनमञ्चुका के जन्म की कथा; नरवाहनदत्त और मदनमंचुका का बाल्य-विलास; नरवाहनदत्त का यौवराज्याभिषेक; शत्रुघ्न और उसकी दुष्टा स्त्री की कथा; राजनीति का सार
5608. || अष्टम कहानी || वत्सराज की कथा; पतिव्रता वैश्यपत्नी की कथा; मदनमञ्चुका के जन्म की कथा; नरवाहनदत्त और मदनमंचुका का बाल्य-विलास; नरवाहनदत्त का यौवराज्याभिषेक; शत्रुघ्न और उसकी दुष्टा स्त्री की कथा; राजनीति का सार अष्टम तरंग वत्सराज की कथा (अनुक्रमशः) एक बार रात के समय वत्सराज उदयन, कलिंगसेना के अनुपम सौन्दर्य का स्मरण करके कामावेश से क्षुब्ध (उत्तेजित) हो गया ।।१।। और उठकर हाथ में नंगी तलवार लिये अकेले ही उसके भवन में गया। कलिंगसेना ने आदर-सत्कार के साथ उसका स्वागत किया ॥२॥ तब राजा ने उससे पत्नी बनने की प्रार्थना की। उत्तर में कलिंगसेना ने कहा- 'अब मैं दूसरे की पत्नी हो गई हैं'- ऐसा कहकर उसे रोक दिया ॥३॥ 'तू तीसरे पुरुष के पास चली गई, इसलिए व्यभिचारिणी हो गई। अत. तेरा समागम करने में कोई दोष नहीं', वत्सराज ने कहा ।।४।। राजा के इस प्रकार कहने पर कलिंगसेना ने कहा- 'हे राजन् ! मैं तुम्हारे लिए यहाँ आ गई, किन्तु तुम्हारा रूप धारण करनेवाले मदनवेग नामक विद्याधर ने गुप्त रूप से मेरे साथ विवाह कर लिया। वही मेरा एक पति है, अब मैं व्यभिचारिणी कैसे हुई ॥५-६।॥ अपने सम्बन्ध...