05. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 05 || गब्बर ने ठीक ही कहा था "जो डर गया वो मर गया "

 05. यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 05 || गब्बर सिंह कह कर गया  "जो डर गया वो मर गया " 


अजीब डर का माहौल है। सर्दी का कोई भी लक्षण दिखे बस महामारी के होने का डर दिल में बैठ जाता है। लेकिन कोरोना नामक महामारी का एक प्रमुख लक्षण स्वाद का चले जाना है जो अक्सर नजला जुकाम में चला ही जाता है।

लेकिन यह घटना मेरे एक दोस्त के साथ करीब एक माह पहले घटित हुई थी। उसी को मैं आपके सामने रखने का प्रयास कर रहा हूं।

आज घर का खर्चा ने चलने के कारण शुभम और शोभा में खटपट हो गई। शोभा, शुभम की बीबी आज खाने में नमक डालना भूल गई और उधर पति टेंशन में आ गया कि खाने में स्वाद नहीं आ रहा। 

वह डर गया और बिना कुछ कहे आफिस निकल लिए, इधर शोभा टेंशन में आ गयी कि बिना पूरा खाना खाये ही ऑफिस के लिए निकल गए । 

जब सुबह खाना खाने लगे तो उसे पता चला कि खाने में नमक डालना ही भूल गई। शोभा डर गई की कही गुस्से में तो नही चले गए। 

आफिस में शुभम का पूरा दिन टेंशन में गुजर गया । इसी टेंशन में उसने कुछ खाया पिया भी नहीं। शाम को घर आया और खुद को बिना बोले एक कमरे में रिजर्व अर्थात कोरनटाइन कर लिया और शोभा को लगा है कि शायद ऑफिस से कोरोना पॉजिटिव हो गए है। 

शोभा भी डर गई । उसने शुभम से पूछा कहीं नाराज तो नहीं हो।

शुभम मुस्कुराया और बोला ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे फीवर जैसा लग रहा है। 

तुमलोग मुझसे दूर रहो। सभी डर गए, घर में अफरा तफरी का माहौल हो गया। हुआ यह था कि दिन भर, दिमाग में फीवर - फीवर सोचते सोचते शरीर का तापमान भी बढ़ गया। 

थरमामीटर भी शरीर का तापमान 99 से ऊपर दिखाने लगा । गला भी रुंधा हुआ महसूस होने लगा। सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी। शरीर बेचैन हो गया। शुभम ने गरम पानी से गरारे करने शुरू कर दिए।

रात के खाने में शोभा ने खूब गरम गरम स्वादिष्ठ भोजन पनीर की सब्जी के साथ बनाया।

'लो खाना खा लो।' कहते हुए खाने की थाली शुभम के आगे कर दी।

शुभम टेंशन में था 'रहने दो शोभा, भूख नहीं है।'

'डॉक्टर भी खाली पेट रहने के लिए मना करते हैं । कुछ तो खा लो। शरीर में कमजोरी आ जाएगी।'

'चलो इसमें से थोड़ा-थोड़ा ले आओ। अब क्या स्वाद, भोजन में टेस्ट ही नही रहा। पर पेट तो भरना ही है। '

अनमने मन से थाली अपनी तरफ खींचकर पहला निवाला मुँह में डाला। पनीर का टेस्ट आते ही उछल पड़ा ।

'अरे वाह हुर्रे !' शुभम तेजी से चिल्लाया।

'क्या हुआ?' शोभा ने पूछा

अरे भाग्यवान सुनती हो, स्वाद आ गया - स्वाद आ गया । लगता है कोरोना छू के निकल लिया। भगवान का लाख शुक्र है। 

शोभा को आश्चर्य हुआ। फिर शुभम ने सुबह की सारी घटना सुनाई। 

शोभा को सारा माजरा समझ मे आ गया। वह मन ही मन मुस्कुराई पर वह चुप रही।

'भगवान का लाख-लाख शुक्र है पर उसने मेहर कर दी।'

शोभा के साथ शुभम भी भगवान का शुक्र अदा करने लगा। 

दिमाग से टेंशन हटते ही शुभम के शरीर का तापमान भी नॉर्मल हो गया था।

साथ ही घर का टेंशन भरा माहौल भी अब खुशनुमा हो गया। 

अचानक से शोभा के मुंह से निकला की गब्बर ने ठीक ही कहा था "जो डर गया वो मर गया ।" 

शुभम को अभी तक नहीं समझ आया कि शोभा ने शोले का डायलॉग क्यों बोला था?

सकारात्मक बने रहे.......घर पर रहे । सुरक्षित रहें , संयमित रहे, निश्चित दूरी बनाए रखें।   

 लेखक


ॐ जितेंद्र सिंह तोमर
11/5/7/4/2021              
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