02.0 यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 02 || एक कहानी..... जो न जाने कितनों की जान बचा सकती है।

 02.0 यह दिल्ली है मेरी जान || कहानी 02 ||  एक कहानी..... जो न जाने कितनों की जान बचा सकती है।

 जब तक कोविड नहीं हुआ, टीका नहीं लगवाया, दिन भर यहां वहां घूमा। मूर्ख बना रखा है, कोविड तो है ही नहीं, सरकार और पूंजिपतियों का षड़यंत्र है। 

रिश्तेदारों में गए, शादी विवाह मैं यहां वहां घूमते रहे ....

एक दिन बुखार महसूस हुआ तो लगा वायरल है यार, कोविड-वोविड कुछ नहीं, एक पैरासिटामोल ले लेता हूं।

बुखार के दूसरे दिन बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटिबायोटिक्स ले लेता हूं, करोना टेस्ट की जरूरत नहीं है, वे लोग जबरदस्ती पॉजिटिव बता रहे हैं यदि मैंने भी टेस्ट कराया तो मुझे भी जबरदस्ती पाज़ीटिव बता देंगे।

बुखार के तीसरे दिन बुखार नहीं उतर रहा तो सीटी स्कैन करा लेता हूं, आरटी- पीसीआर की रिपोर्ट तो चार दिन बाद आएगी । ( सीटी का स्कोर पहले दो तीन दिन में 3-4 ही रहता है तो निश्चिंत हो गया कि मैं स्वस्थ हूं।)

बुखार के चौथे दिन में भी बुखार है, चलो ब्लड टेस्ट करा लेता हूं ( ब्लड टेस्ट में क्रास रिएक्शन की वजह से फाल्स टायफाइड पाज़िटिव दिख सकता है। यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए जो इन साहब को नहीं मालूम।) जब रिपोर्ट आई तो 

ओ तेरी..., ये तो टायफाइड हो गया है।

पांचवें दिन, अब टायफाइड का पता चल ही गया है तो मेडिकल स्टोर से एंटिबायोटिक्स ले लेता हूं,  डाक्टर जबरन दो-चार सौ ऐंठ लेगा।

छठवें दिन, एंटिबायोटिक्स चल रही हैं, पर कमजोरी बहुत लग रही है।

सातवें दिन, डाक्टर मित्र को फोन करके पूछा तो उसने कहा आरटीपीसीआर करवाओ, वहां पहुंचे तो बड़ी भीड़ थी। बड़ी मुश्किल से टेस्ट हुआ, अब रिपोर्ट तीन दिन में आएगी।

 आठवें दिन, अब तो उठने बैठने में सांस फूलने लगी, आक्सीजन लेवल चैक करवाया तो 85 निकला डाक्टर मित्र ने फौरन भर्ती हो कर आक्सीजन लगवाने को कहा, अब ना कहीं बेड मिल पा रहा और ना आक्सीजन। 

और शुरू हुआ सरकार को कोसने का सिलसिला, साला कोई व्यवस्था नहीं, कोई सुनवाई नहीं।

जैसे तैसे बेड और आक्सीजन की व्यवस्था हुई। कोई राहत नहीं मिली तो (अस्पताल को गरियाना शुरू) आक्सीजन और कम हो गई। डाक्टर ने कहा हालत ज्यादा क्रिटिकल है, वेंटिलेटर लगाना पड़ेगा (डाक्टर को गरियाना शुरू) साले लूटते हैं, और वेंटिलेटर को झूठी सांस देने वाली मशीन समझकर ठुकरा दिया गया।

कहानी खत्म...!! (परिजनों का अस्पताल में हंगामा, पत्रकारों को मसाला, डैड बाडी घर ले जाने दो, खोल कर दिखाओ।)

इसी कोविड साइकिल का अगला मरीज लाईन में है....!!!

भाईयो, बुखार आते ही क्वालिफाइड डाक्टर से मिलें, उटपटांग सलाह और मनमर्जी से निर्णय नहीं लें, और जांच जरूर करवाएं। 

👏🏻👏🏻🌹🌹धन्यवाद🌹🌹👏🏻👏🏻

👏🏻🌹 *घर रहे सुरक्षित रहे*🌹👏🏻


ॐ जितेंद्र सिंह तोमर
11/6/1/5/2021

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