तिलोत्तमा, सुन्द या उपसुन्द, किसके साथ विवाह करेगी ?
तिलोत्तमा, सुन्द या उपसुन्द, किसके साथ विवाह करेगी ?
प्राचीन काल में एक नगर में निकुंभ नाम का एक राक्षस रहता था। निकुंभ के दो पुत्र थे। एक का नाम नाम सुन्द था, दूसरे का नाम उपसुन्द। दोनों बड़े प्रतापी व बड़े बलवान थे। दोनों में आपस में बड़ी प्रीति थी। एक बार सुन्द-उपसुन्द के मन में विचार पैदा हुआ कि वे दोनों ऐसा तप करें, जिससे वे धरती पर अमर हो जायें। दोनों ही अमर बनने के लिए तप करने लगे।
आख़िर, ब्रह्मा जी उनके घर तप से प्रसन्न हुए और प्रगट होकर बोले - " पुत्रो ! हम तुम दोनों पर प्रसन्न हैं। तुम दोनों जो चाहो, मांग सकते हो।"
सुन्द-उपसुन्द ने कहा "हम दोनों धरती पर अमर बनना चाहते हैं।"
ब्रह्मा जी ने कहा- "धरती पर कोई अमर नहीं हो सकता। जो जन्म लेता है, उसे मरना अवश्य पड़ता है। कोई और चीज़ मांगो।"
सुन्द-उपसुन्द ने कहा "अच्छा, तो आप यह वरदान दें, हम दोनों भाई न तो कभी किसी से हार खायें, न मारे जायें।"
ब्रह्मा जी ने 'एवमस्तु' कहा. सुन्द-उपसुन्द बड़े प्रसन्न हुए। प्रसन्न ही नहीं, उनके मन में घमंड भी पैदा हो उठा।
सुन्द-उपसुन्द के मन के घमंड ने उन्हें अत्याचारी बना दिया। वे ऋषियों-मुनियों को दुःख देने लगे, उनकी कुटियों को जलाने लगे, उनके बाल-बच्चों की हत्या करने लगे।
ब्रह्मा जी बड़े दुःखी हुए। वे मन ही मन पछताने लगे, 'उन्होंन सुन्द-उपसुन्द -उपसुन्द को वरदान देकर बुरा किया।' आखिर, ब्रह्मा जी ने युक्ति खोज ही निकाली। उन्हों ने विश्वकर्मा को बुला कर आदेश दिया "एक ऐसी स्त्री बनाओ, जो सब से अधिक सुन्दर हो।"
विश्वकर्मा ने एक बहुत ही सुन्दर स्त्री बना कर तैयार कर दी
उस स्त्री का नाम तिलोत्तमा था।
सुन्द-उपसुन्द ने जब तिलोत्तमा को देखा, तब दोनों उस पर लट्टू हो गये, दोनों उसके साथ विवाह करने के लिए तैयार हो उठे।
तिलोत्तमा ने कहा- "हम तुम दोनों भाइयों से विवाह करने के लिए तैयार हैं, पर विवाह तो किसी एक के ही साथ होगा। पहले तुम दोनों फैसला कर लो, कौन मेरे साथ विवाह करेगा।"
सुन्द-उपसुन्द आपस में विवाद करने लगे और दोनों के विवाद ने लड़ाई का रूप धारण कर लिया। दोनों गदा लेकर एक-दूसरे पर प्रहार करने लगे और एक-दूसरे के प्रहार से मर गये।
ऋषि-मुनियों में प्रसन्नता की लहर छा गई, क्योंकि सुन्द उपसुन्द के रूप में एक ऐसे अत्याचारी का अन्त हुआ था, जो सब को बड़ा दुःख देता था।
सुंद-उपसुंद को संयम न रखने के कारण जान गंवानी पड़ी।
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