यह घटना अपने आप में बहुत गहरी प्रेरणा देने वाली है। मैं इसे एक भावनात्मक और प्रभावशाली कहानी के रूप में लिखता हूँ, ताकि जो भी इसे सुने, उसके मन में “समाज के लिए कुछ करने” की प्रबल इच्छा जागे। कहानी : एक चादर, एक संकल्प एक बार की बात है। हरियाली से घिरा हुआ एक छोटा-सा गाँव था, जहाँ किसान अपने पसीने की कमाई से परिवार का पेट पालते थे। गाँव की मिट्टी में अनाज तो खूब उगता था, लेकिन पैसों की तंगी हमेशा हर घर में रहती थी। इसी गाँव में एक किसान का देहांत हो गया। उसके घर में न खाने के लिए अन्न बचा था और न ही क्रियाकर्म करने के लिए पैसे। उसकी विधवा पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे असहाय खड़े थे। आँखों में आँसू और मन में एक ही सवाल था—“अब हम क्या करेंगे?” यह खबर पूरे गाँव में फैल गई। लोग इकट्ठे हुए। सबके दिल भारी थे, लेकिन किसी के पास इतना धन नहीं था कि पूरे संस्कार का बोझ अकेले उठा सके। तभी गाँव के बुज़ुर्ग खड़े हुए और बोले – “भाइयो-बहनो, हम सब किसान हैं। पैदावार हर मौसम में नहीं होती। कभी खेत लहलहाते हैं, कभी सूखे पड़ जाते हैं। लेकिन इंसान का धर्म यही है कि दुख में हम सब साथ खड़े हों। आज से इस गाँ...
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